"मन चंगा तो कठौती में गंगा"
💬 अर्थ
यदि मन शुद्ध है तो घर पर ही ईश्वर का वास है।
✏️ वाक्यात उपयोग
तीर्थ यात्रा पर जाने से क्या होगा, यदि आचरण सही है तो मन चंगा तो कठौती में गंगा।
यदि मन शुद्ध है तो घर पर ही ईश्वर का वास है।
तीर्थ यात्रा पर जाने से क्या होगा, यदि आचरण सही है तो मन चंगा तो कठौती में गंगा।
कथनी और करनी में अंतर होना।
नेताओं के चुनावी वादे हाथी के दाँत की तरह होते हैं, खाने के और दिखाने के और।
ज़रूरतमंद को ही स्रोत के पास जाना पड़ता है।
यदि तुम्हें नौकरी चाहिए तो कंपनी जाओ, क्योंकि प्यासा कुएँ के पास जाता है।
झूठी शान दिखाना।
जेब में पैसे नहीं हैं और वह फाइव स्टार होटल में खाने की बात कर रहा है, वही हुआ—घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने।
दिखावे के लिए मित्रता पर मन में शत्रुता रखना।
वह सामने तो मीठी बातें करता है पर पीठ पीछे बुराई, वही बात हुई—मुँह में राम बगल में छुरी।
अत्यधिक दुख या कष्ट होना।
गरीब की झोपड़ी जलते देख सबका कलेजा फट गया।
बहुत कठिन कार्य को बहुत कम समय में करने की कोशिश करना।
तुम चाहते हो कि एक ही दिन में सारा काम खत्म हो जाए, यह हथेली पर सरसों जमाने जैसा है।
बहुत अधिक आदर-सत्कार करना।
जीतकर लौटे खिलाड़ियों को देशवासियों ने सिर आँखों पर बैठाया।
अच्छी चीज़ में और अधिक गुण जुड़ना।
वह गायिका तो अच्छी थी ही, उसका अभिनय भी लाजवाब निकला, यह तो सोने पर सुहागा हो गया।
डर के मारे घबरा जाना।
सामने अचानक साँप को देखकर रमेश के हाथ पाँव फूल गए।
हमेशा खतरे का डर बना रहना।
कंपनी में छँटनी शुरू हो गई है, अब सबके सिर पर तलवार लटक रही है।
भय या डंडे के डर से काम करना।
जब तक अध्यापक हाथ में डंडा नहीं लेते छात्र नहीं पढ़ते, आखिर लकड़ी के बल बंदर नाचे।