🗣️ मुहावरे / लोकोक्तियाँ (Muhaware)

मराठी (Marathi) हिंदी (Hindi) English

"बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा"

💬 अर्थ

पास रखी वस्तु को दूर खोजना।

✏️ वाक्यात उपयोग

चश्मा दादाजी के सिर पर था और वह पूरे घर में ढूँढ रहे थे, वही हुआ—बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा।

"खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है"

💬 अर्थ

देखा-देखी व्यवहार करना या संगति का असर होना।

✏️ वाक्यात उपयोग

एक को छुट्टी लेते देख सबने आवेदन दे दिया, सच है कि खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है।

"साँच को आँच नहीं"

💬 अर्थ

सच्चे व्यक्ति को किसी का डर नहीं होता।

✏️ वाक्यात उपयोग

यदि तुमने पैसे नहीं चुराए हैं तो डरो मत, क्योंकि साँच को आँच नहीं।

"आम के आम गुठलियों के दाम"

💬 अर्थ

दुगुना लाभ प्राप्त करना।

✏️ वाक्यात उपयोग

अखबार पढ़कर रद्दी में बेच दिए, इसे कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम।

"जस दूल्हा तस बनी बराता"

💬 अर्थ

जैसे मुखिया, वैसे ही उसके साथी।

✏️ वाक्यात उपयोग

भ्रष्ट अधिकारी के सारे कर्मचारी भी वैसे ही हैं, इसे कहते हैं जस दूल्हा तस बनी बराता।

"जिसकी लाठी उसकी भैंस"

💬 अर्थ

शक्तिशाली व्यक्ति की ही जीत होती है।

✏️ वाक्यात उपयोग

गाँव की पंचायत में अमीर की ही चली, सच है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस।

"खोदा पहाड़ निकली चुहिया"

💬 अर्थ

बहुत अधिक परिश्रम करने पर भी कम फल मिलना।

✏️ वाक्यात उपयोग

दिन भर की जाँच के बाद पुलिस को केवल एक छोटा सा चोर मिला, वही हुआ खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

"दूर के ढोल सुहावने"

💬 अर्थ

दूर से चीजें अच्छी लगती हैं पर वास्तविकता अलग होती है।

✏️ वाक्यात उपयोग

विदेश की जिंदगी दूर से अच्छी लगती है, पर सच तो यह है कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

"मान न मान मैं तेरा मेहमान"

💬 अर्थ

जबरदस्ती किसी के गले पड़ना।

✏️ वाक्यात उपयोग

वह बिना बुलाए ही पार्टी में आ गया, यह तो वही बात हुई—मान न मान मैं तेरा मेहमान।

"कंगाली में आटा गीला"

💬 अर्थ

एक मुसीबत के ऊपर दूसरी मुसीबत का आ जाना।

✏️ वाक्यात उपयोग

नौकरी पहले ही छूट गई थी, अब बीमारी ने घेर लिया, इसे कहते हैं कंगाली में आटा गीला।

"मूँछ का सवाल होना"

💬 अर्थ

प्रतिष्ठा या सम्मान का प्रश्न होना

✏️ वाक्यात उपयोग

इस प्रतियोगिता को जीतना अब गाँव के लिए मूँछ का सवाल बन गया है।

"पगड़ी उछालना"

💬 अर्थ

भरी सभा में किसी का अपमान करना

✏️ वाक्यात उपयोग

बुजुर्गों की पगड़ी उछालना किसी भी सभ्य समाज के लिए शोभा नहीं देता।