"पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होतीं"
💬 अर्थ
सभी इंसान एक जैसे नहीं होते।
✏️ वाक्यात उपयोग
अगर छोटा भाई आलसी है तो इसका मतलब यह नहीं कि बड़ा भी वैसा होगा, पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होतीं।
सभी इंसान एक जैसे नहीं होते।
अगर छोटा भाई आलसी है तो इसका मतलब यह नहीं कि बड़ा भी वैसा होगा, पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होतीं।
असंभव शर्त रख देना।
तुम कहते हो जब मर्सिडीज आएगी तभी ऑफिस जाओगे, यह तो वही हुआ—न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।
भविष्य के बड़े लाभ की तुलना में वर्तमान का छोटा लाभ अच्छा है।
मैं उधार नहीं बेचता, मेरे लिए तो नौ नगद न तेरह उधार की नीति ही सही है।
बिना गवाह के किया गया अच्छा काम व्यर्थ होता है।
तुम घर में कितना भी अभ्यास करो, प्रतियोगिता में प्रदर्शन जरूरी है, वर्ना जंगल में मोर नाचा किसने देखा।
सब कुछ खत्म होने पर भी घमंड का बना रहना।
संपत्ति बिक गई पर जमींदार साहब का अकड़ना नहीं गया, सच है—रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई।
सौ छोटे प्रहारों की तुलना में एक शक्तिशाली प्रहार अधिक प्रभावी होता है।
दुश्मन घंटों डींगें मारता रहा, पर सेनापति की एक ही चाल ने उसे हरा दिया—इसे कहते हैं सौ सुनार की एक लुहार की।
अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेना नीम हकीम खतरा-ए-जान वाली बात है।
प्रत्यक्ष बात के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
यदि तुम कहते हो कि तुम तेज दौड़ते हो तो दौड़कर दिखाओ, हाथ कंगन को आरसी क्या।
बिना परिश्रम के अचानक लाभ मिलना।
अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे पदोन्नति मिल गई, यह तो वही हुआ—बिल्ली के भागों छींका टूटा।
पुरानी परंपराओं का अंधानुकरण करना।
आज के विज्ञान के युग में भी तुम पुराने रीति-रिवाज ढो रहे हो, तुम तो लकीर के फकीर हो।
कार्य शुरू करते ही विघ्न आ जाना।
नया व्यापार शुरू किया ही था कि लॉक-डाउन लग गया, यह तो वही हुआ—सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना।
अपने स्थान पर गुणी व्यक्ति की कद्र न होना।
गाँव के वैद्य को कोई नहीं पूछता पर शहर के डॉक्टर की बड़ी वाहवाही है, इसे कहते हैं घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।