अविनाशि तु तद् विद्धि येन सर्वमिदं ततम् । विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥
जैसे आकाशीं अभ्र उमटे | तें आकाशींचि माघौतें आटे | तैसें चैतन्यीं जग प्रकटे | आणि चैतन्यींचि लया जाय ||
"As clouds arise in the sky and dissolve back into the sky, so does the world manifest in Consciousness and dissolve back into Consciousness."
💡 अर्थ
जैसे आकाश में बादल प्रकट होते हैं और पुनः आकाश में ही विलीन हो जाते हैं, वैसे ही यह संसार उस परमतत्व (चैतन्य) में प्रकट होता है और उसी में लय हो जाता है।