सिंह, ऊँट और चतुर तिकड़ी
एक विशाल जंगल में मदोत्कट नाम का एक शक्तिशाली सिंह रहता था। उसके तीन सेवक थे: एक कौआ, एक सियार और एक चीता। वे तीनों बहुत चालाक थे। एक दिन, एक ऊँट जिसका नाम उष्ट्रनक था, अपने काफिले से बिछड़कर जंगल में आ गया। सिंह ने उसे दया दिखाते हुए अभयदान दिया और अपने साथ रहने की अनुमति दी। कुछ समय बाद, एक हाथी से लड़ाई के दौरान सिंह बुरी तरह घायल हो गया और शिकार करने में असमर्थ हो गया। सिंह के भूखे रहने के कारण उसके सेवक भी भूख से तड़पने लगे। सियार ने ऊँट को मारने की योजना बनाई, लेकिन सिंह अपने वचन पर अडिग था। तब सियार ने एक चाल चली। उसने ऊँट को विश्वास दिलाया कि राजा की सेवा करना उसका धर्म है। दरबार में, कौआ, सियार और चीते ने बारी-बारी से सिंह के सामने खुद को भोजन के रूप में पेश किया। यह देखकर भोले ऊँट ने भी सोचा कि उसे भी अपनी बलि देनी चाहिए। जैसे ही ऊँट ने खुद को पेश किया, चालाक सियार और चीते ने उस पर हमला कर दिया और उसे मार डाला। ऊँट को अपनी मासूमियत और गलत संगति की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
💡 सीख
धूर्त और स्वार्थी लोगों की मीठी बातों पर कभी भरोसा न करें; उनकी संगति घातक हो सकती है।
📝 स्पष्टीकरण (Explanation)
पंचतंत्र की यह कहानी हमें उन लोगों के साथ रहने के खतरों के बारे में बताती है जो स्वभाव से स्वार्थी और धूर्त होते हैं। ऊँट ने अपनी मासूमियत में यह नहीं समझा कि सियार और चीता शिकारी जानवर हैं। यह कहानी सिखाती है कि चापलूसी और झूठी वफादारी अक्सर दूसरों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल की जाती है। हमें हमेशा अपने मित्रों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।