राजा और मूर्ख बंदर
बहुत समय पहले, एक शक्तिशाली राजा के पास एक पालतू बंदर था। राजा उस बंदर पर बहुत भरोसा करता था और उसे महल में कहीं भी आने-जाने की अनुमति थी। बंदर भी राजा का बहुत वफादार था। एक दोपहर, जब राजा अपने कक्ष में सो रहा था, उसने बंदर को पहरा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोई उसकी नींद में खलल न डाले। बंदर हाथ में पंखा लेकर राजा को हवा करने लगा। तभी एक मक्खी कमरे में आई और राजा की नाक पर बैठ गई। बंदर ने उसे पंखे से उड़ा दिया, लेकिन मक्खी बार-बार लौटकर राजा के चेहरे पर बैठने लगी। बंदर को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा कि यह मक्खी राजा का अपमान कर रही है। उसने पास में रखी राजा की तलवार उठा ली। जैसे ही मक्खी अगली बार राजा की छाती पर बैठी, बंदर ने उसे मारने के लिए पूरी ताकत से तलवार चलाई। मक्खी तो उड़ गई, लेकिन तलवार का वार सीधे राजा की छाती पर लगा और राजा की मृत्यु हो गई। बंदर की मूर्खता के कारण राजा को अपनी जान गंवानी पड़ी।
💡 सीख
मूर्ख मित्र से बुद्धिमान शत्रु बेहतर होता है।
📝 स्पष्टीकरण (Explanation)
यह कहानी हमें सिखाती है कि केवल वफादारी ही काफी नहीं है; बुद्धि और सामान्य ज्ञान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। एक मूर्ख व्यक्ति को करीबी दोस्त या सहायक के रूप में रखने से अनपेक्षित आपदाएं आ सकती हैं, भले ही उनके इरादे अच्छे हों।