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सियार और ढोल

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एक विशाल जंगल में गोमय नाम का एक सियार रहता था। एक बार जंगल में भोजन की भारी कमी हो गई। गोमय कई दिनों से भूखा था। भोजन की तलाश में वह जंगल के एक ऐसे हिस्से में पहुँच गया जहाँ बहुत पहले युद्ध हुआ था। वह इलाका अब सुनसान और वीरान था। जब गोमय वहाँ घूम रहा था, तभी अचानक उसे एक तेज़ और डरावनी आवाज़ सुनाई दी—'ढम... ढम... ढम!' यह आवाज़ सुनते ही सियार डर के मारे काँपने लगा। उसने सोचा, 'हे भगवान! यह आवाज़ तो किसी विशाल राक्षस जैसी लग रही है। निश्चित रूप से यहाँ कोई भयानक प्राणी रहता है। मेरा यहाँ से भाग जाना ही बेहतर है, वरना वह मुझे मार डालेगा।' वह भागने ही वाला था कि तभी उसके मन में एक विचार आया। उसने खुद को समझाया, 'खतरे की प्रकृति जाने बिना भाग जाना कायरता है। पहले मुझे यह देखना चाहिए कि वह आवाज़ कहाँ से आ रही है।' सियार झाड़ियों के पीछे छिपते हुए सावधानी से आगे बढ़ा। थोड़ी ही दूरी पर उसे एक बड़ा ढोल दिखाई दिया। यह ढोल युद्ध के बाद वहीं छूट गया था। जब भी हवा चलती थी, पास के पेड़ की सूखी टहनियाँ ढोल पर टकराती थीं और उससे वह तेज़ आवाज़ आती थी। सियार को हँसी आ गई। उसे समझ आ गया कि यह केवल एक निर्जीव वस्तु की आवाज़ है। उसने सोचा कि चूँकि आवाज़ इतनी तेज़ है, तो ढोल के अंदर निश्चित रूप से मांस या चर्बी भरी होगी। उसने बड़ी मेहनत से ढोल का चमड़ा फाड़ दिया, लेकिन जब अंदर देखा तो वह पूरी तरह से खाली था। गोमय को भोजन तो नहीं मिला, लेकिन उस दिन उसे एक बहुत बड़ा सबक मिला। उसने तय किया कि अब से वह केवल आवाज़ से डरकर कभी नहीं भागेगा।

💡 सीख

खतरे के असली कारण को जाने बिना केवल शोर से नहीं डरना चाहिए।

📝 स्पष्टीकरण (Explanation)

सियार और ढोल की कहानी हमें साहस और जांच-पड़ताल के महत्व के बारे में सिखाती है। अक्सर हम उन चीजों से डर जाते हैं जिन्हें हम समझ नहीं पाते। अपने डर के स्रोत का सामना करके, सियार ने पाया कि वह आवाज़ हानिकारक नहीं थी। भले ही उसे भोजन नहीं मिला, लेकिन उसकी बहादुरी ने उसे अनावश्यक घबराहट से बचा लिया।

🤔 Discussion Questions

Q1 ढोलाचा आवाज ऐकल्यावर कोल्ह्याला सुरुवातीला काय वाटले?
Ans: कोल्ह्याला सुरुवातीला वाटले की तिथे एखादा महाकाय राक्षस आहे जो त्याला मारून टाकेल.
Q2 आवाजाच्या स्रोताचा तपास केल्यावर कोल्ह्याला काय समजले?
Ans: कोल्ह्याला समजले की आवाज फांद्या ढोलावर आदळल्यामुळे येत होता आणि केवळ आवाजाला घाबरून पळून जाणे चुकीचे आहे.