संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥
तंव अर्जुन म्हणे देवा । हा संन्यासु जो सांगावा । तोचि कर्मयोगु बरवा । म्हणतसां तुम्ही ॥
"Then Arjuna said, O Lord, you speak of Sanyasa (renunciation) and then you also praise Karma Yoga as being good. Tell me which is better."
💡 अर्थ
अर्जुन ने कहा: हे कृष्ण! आप पहले कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इन दोनों में से जो मेरे लिए निश्चित रूप से कल्याणकारी हो, वह मुझे बताइए।