सोमवार, 29 जून 2026
आज

शालेय परिपाठ म्हणजे महाराष्ट्रातील शाळांमध्ये दररोज सकाळी होणारा कार्यक्रम. या पृष्ठावर आजचा संपूर्ण परिपाठ — सुविचार, पंचांग, दिनविशेष, सुभाषित, बातम्या, बोधकथा आणि इतर उपयुक्त माहिती उपलब्ध आहे.

💡 सुविचार

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"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।"

— लोकमान्य तिलक

📅 पंचांग

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तिथी: ज्येष्ठ पौर्णिमा (०४:३५ पर्यंत, नंतर आषाढ कृष्ण प्रतिपदा)
नक्षत्र: मूळ (१२:४४ पर्यंत)
वार: सोमवार
पक्ष: शुक्ल पक्ष / कृष्ण पक्ष
🌅 06:00
🌇 19:14
🎉 वटपौर्णिमा, ज्येष्ठ पौर्णिमा

📌 दिन विशेष

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  • 📌
    उद्धव ठाकरे यांचा मुख्यमंत्रीपदाचा राजीनामा (2022 — 4 वर्षे)
  • 📌
    पहिल्या आयफोनचे (iPhone) विक्रीसाठी पदार्पण (2007 — 19 वर्षे)
  • 📌
    आर्जेंटिनाने जिंकला दुसरा फिफा विश्वचषक (1986 — 40 वर्षे)
  • 📌
    ब्राझीलने जिंकला पहिला फिफा फुटबॉल विश्वचषक (1958 — 68 वर्षे)
  • 📌
    नोबेल फाउंडेशनची स्थापना (1900 — 126 वर्षे)

🕉️ संस्कृत सुभाषित

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🗣️ मुहावरे

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📚 इंग्रजी शिक्षण

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🎯 क्विझ सोडवा

📖 आजची बोधकथा

सर्व कथा
🦁

कौवे और काला सांप

एक विशाल बरगद के पेड़ पर कौओं का एक जोड़ा खुशी-खुशी रहता था। उसी पेड़ के नीचे एक...

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📰 आजच्या बातम्या

सर्व बातम्या

🇮🇳 Jana Gana Mana

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जन-गण-मन अधिनायक जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता।
पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा,
द्राविड़-उत्कल-बङ्ग।
विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा,
उच्छल-जलधि-तरङ्ग।
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मागे,
गाहे तव जय-गाथा।
जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे॥

National Pledge (Pratidnya / Pratigya)

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भारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं।
मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है।
मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा।
मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा।
मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ।
उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।

📜 Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)

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हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता,
प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

🪷 Vande Mataram

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वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं,
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं,
सुखदां वरदां मातरम्॥

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