मंगळवार, 05 मे 2026
आज

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📅 पंचांग

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तिथी: तृतीया (१९:२१ पर्यंत)
नक्षत्र: मूळ (२१:०३ पर्यंत)
वार: मंगळवार
पक्ष: कृष्ण पक्ष
🌅 06:02
🌇 18:59
🎉 संकष्टी चतुर्थी

📌 दिन विशेष

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  • 📌
    जीसॅट-९ (GSAT-9) प्रक्षेपण (2017 — 9 वर्षे)
  • 📌
    पहिला राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार सोहळा (1954 — 72 वर्षे)
  • 📜
    गांधीजींची आगा खान पॅलेस मधून सुटका (1944 — 82 वर्षे)
  • 🎂
    ज्ञानी झैल सिंग जयंती (1916 — 110 वर्षे)
  • 🕯️
    नेपोलियन बोनापार्ट स्मृतीदिन (1821 — 205 वर्षे)

🕉️ संस्कृत सुभाषित

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🗣️ मुहावरे

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"काखेत कळसा आणि गावाला वळसा"

💬 एखादी वस्तू जवळ असतानाही ती सर्वत्र शोधत राहणे.

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दरार वाला घड़ा

एका पाणी भरणाऱ्या माणसाकडे दोन माठ होते. एक माठ अगदी व्यवस्थित होता, पण दुसऱ्याल...

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📰 आजच्या बातम्या

सर्व बातम्या

🇮🇳 Jana Gana Mana

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जन-गण-मन अधिनायक जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता।
पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा,
द्राविड़-उत्कल-बङ्ग।
विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा,
उच्छल-जलधि-तरङ्ग।
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मागे,
गाहे तव जय-गाथा।
जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे,
भारत-भाग्य-विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे॥

National Pledge (Pratidnya / Pratigya)

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भारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं।
मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है।
मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा।
मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा।
मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ।
उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।

📜 Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)

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हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता,
प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

🪷 Vande Mataram

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वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं,
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं,
सुखदां वरदां मातरम्॥

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