Jana Gana Mana
National Anthemनोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित, 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के बहुलवाद, सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतिनिधित्व करता है। मूल रूप से बंगाली में लिखे गए इस गीत के पहले छंद को 1950 में संविधान सभा द्वारा आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था।
📋 मुख्य तथ्य
🎵 बोल
जन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
Jana-gana-mana-adhinayaka jaya he Bharata-bhagya-vidhata. Panjaba-Sindhu-Gujarata-Maratha Dravida-Utkala-Banga Vindhya-Himachala-Yamuna-Ganga Uchchala-Jaladhi-taranga. Tava shubha name jage, Tava shubha ashisa mage, Gahe tava jaya gatha, Jana-gana-mangala-dayaka jaya he Bharata-bhagya-vidhata. Jaya he, jaya he, jaya he, Jaya jaya jaya, jaya he!
💡 अर्थ
आप सभी लोगों के मनों के अधिनायक (शासक) हैं,
हे भारत के भाग्य विधाता।
आपका नाम पंजाब, सिंध, गुजरात और मराठा (महाराष्ट्र) के दिलों को जगाता है,
द्रविड़ (दक्षिण भारत), उत्कल (उड़ीसा) और बंगाल को;
यह विंध्य और हिमालय की पहाड़ियों में गूंजता है,
यमुना और गंगा के संगीत में मिल जाता है और उठती हुई समुद्री लहरों द्वारा गाया जाता है।
वे आपके पवित्र नाम पर जागते हैं, आपके पवित्र आशीर्वाद मांगते हैं और आपकी जय गाथा गाते हैं।
सभी लोगों का कल्याण आपके हाथ में है,
हे भारत के भाग्य विधाता।
आपकी जय हो, जय हो, जय हो, जय जय जय जय हो।
📚 ऐतिहासिक संदर्भ
मूल रूप से पांच छंदों में एक ब्रह्मो भजन के रूप में रचित, 'भारतो भाग्यो बिधाता' पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। कलकत्ता के बाहर, इसे पहली बार 1919 में मदनपल्ले, आंध्र प्रदेश के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में स्वयं टैगोर ने गाया था, जहां उन्होंने 'द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया' के रूप में इसका अंग्रेजी में अनुवाद भी किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी ने 'शुभ सुख चैन' नामक हिंदुस्तानी अनुवादित संस्करण को अपने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। 24 जनवरी 1950 को, भारत की संविधान सभा ने आधिकारिक तौर पर मूल बंगाली गीत के पहले छंद को भारत गणराज्य के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
📏 नियम एवं शिष्टाचार
- • सावधान की मुद्रा: जब भी राष्ट्रगान गाया या बजाया जाता है, तो दर्शकों को अपने हाथों को बाजू में सीधा रखकर सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए।
- • गायन का संदर्भ: राष्ट्रगान को स्कूल की प्रार्थना सभाओं, राष्ट्रीय छुट्टियों (गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस) और आधिकारिक सरकारी कार्यों के दौरान सामूहिक रूप से गाया जाना चाहिए।
- • समय: राष्ट्रगान के पूर्ण औपचारिक गायन में सख्ती से 52 सेकंड का समय लगना चाहिए। छोटे संस्करण (पहली और आखिरी पंक्ति) में लगभग 20 सेकंड लगते हैं।
- • बदलाव का निषेध: राष्ट्रगान की पैरोडी नहीं की जा सकती, इसकी लय में बदलाव नहीं किया जा सकता है या इसे अलग-अलग गीतों के साथ नहीं गाया जा सकता है।
- • सम्मानजनक वातावरण: इसे ऐसे वातावरण में नहीं बजाया जाना चाहिए जो विघटनकारी हो या जिसमें राष्ट्रीय प्रतीक की अपेक्षित गरिमा का अभाव हो।