परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
मंगळवार, 03 नोव्हेंबर 2026सुविचार
→❝ जो दुखी और पीड़ितों को अपना कहता है, वही सच्चा साधु है और ईश्वर वहीं बसता है। Meaning_en: True spirituality lies in serving the poor and the suffering. Meaning_hi: मानवता की सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है। person_ref: {slug: sant-tukaram, name_mr: संत तुकाराम, auto_create: true, birth_date: 1598-01-01, death_date: 1650-01-01, name_en: Sant Tukaram, name_hi: संत तुकाराम, person_type: Saint/Poet, short_bio_en: 17th-century Marathi poet-saint of the Bhakti movement., short_bio_mr: वारकरी संप्रदायातील श्रेष्ठ संत कवी., wikipedia_url: https://en.wikipedia.org/wiki/Tukaram}, tags: [{slug: humanity, name_mr: माणुसकी, name_en: Humanity}, {slug: spirituality, name_mr: अध्यात्म, name_en: Spirituality}] ❞
दुःखी आणि पीडित लोकांना जे आपला मानतात, तिथेच देव वास करतो.
पंचांग
→आजचे पंचांग उपलब्ध नाही
संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणौनि तोचि स्थिरप्रज्ञु । जो इंद्रियांचा निग्रहु । करूनि जाहला समर्थु । आत्मबोधीं ॥
📖 विस्तार →ज्याने आपल्या इंद्रियांवर पूर्ण ताबा मिळवला आहे आणि जो आत्मज्ञानामध्ये स्थिर झाला आहे, तोच खरा स्थिर बुद्धीचा (स्थिरप्रज्ञ) माणूस होय.
तरी उचित कर्म सांडिजे । आणि मग निवांत होइजे । हे न घडे गा पाविजे । कवणेंही परी ॥
📖 विस्तार →आपले योग्य कर्तव्य सोडून देणे आणि मग शांत बसून राहणे, हे कोणालाही शक्य नाही आणि त्यातून मोक्षही मिळत नाही.
विशेष लेख (ब्लॉग)
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥