"मोम से कोमल, वज्र से कठोर।" — संत तुकाराम 💬 अर्थ हम भक्त मोम से भी कोमल हैं, लेकिन समय आने पर वज्र से भी कठोर हो सकते हैं। 📎 स्रोत: अभंग गाथा