आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् । तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥
जैसा समुद्रु भरला । तरी न सांडी आपुली वेला । तैसा तोही संतोखला । क्षोभु न पावे ॥
"As the ocean remains unmoved even when filled by waters, so does the man of steady wisdom remain peaceful despite all desires entering him."
💡 अर्थ
जैसे नदियों के जल से निरंतर भरे जाने पर भी समुद्र अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता और स्थिर रहता है, वैसे ही ज्ञानी पुरुष भोगों के प्राप्त होने पर भी विचलित नहीं होता और शांति प्राप्त करता है।