कौवे और काला सांप
एक विशाल बरगद के पेड़ पर कौओं का एक जोड़ा खुशी-खुशी रहता था। उसी पेड़ के नीचे एक खोखले बिल में एक बड़ा और क्रूर काला सांप रहता था। जब भी मादा कौआ अंडे देती, वह सांप पेड़ पर चढ़कर उन्हें खा जाता था। अपने बच्चों को खोने के कारण कौओं का जोड़ा बहुत दुखी था। वे सांप से बहुत नाराज थे, लेकिन वे जानते थे कि वे शारीरिक रूप से उससे नहीं लड़ सकते।
एक दिन, कौआ अपने मित्र, एक चतुर लोमड़ी के पास गया और सलाह मांगी। कौवे ने कहा, 'मित्र, वह सांप हमारे बच्चों को जीने नहीं देता। हम उसे कैसे हरा सकते हैं?' लोमड़ी ने कुछ देर सोचा और एक योजना बताई। उसने कहा, 'शक्ति से युक्ति श्रेष्ठ होती है। कल सुबह तुम राजमहल के बगीचे में जाना जहाँ रानी और उसकी दासियाँ स्नान के लिए आती हैं। रानी अपना कीमती सोने का हार किनारे पर रख देगी। तुम उनमें से एक हार उठाना और उसे सांप के बिल में डाल देना।'
अगली सुबह कौवे ने ठीक वैसा ही किया। जब रानी स्नान कर रही थी, कौवे ने झपट्टा मारा और उसका सोने का हार उठाकर उड़ गया। महल के पहरेदार चिल्लाते हुए कौवे का पीछा करने लगे। कौवे ने वह हार सांप के बिल में डाल दिया और खुद दूर एक पेड़ की शाखा पर बैठ गया। जब सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्हें बिल में हार दिखाई दिया। हार निकालने के लिए जब उन्होंने डंडा चलाया, तो क्रोधित काला सांप बाहर निकल आया। सैनिकों ने सांप को देखा और अपनी सुरक्षा के लिए उसे मार डाला। वे हार लेकर चले गए। इस प्रकार, कौओं ने अपनी बुद्धि के बल पर उस शक्तिशाली सांप से छुटकारा पा लिया और फिर से सुख से रहने लगे।
💡 सीख
बुद्धि शारीरिक बल से अधिक शक्तिशाली होती है।
📝 स्पष्टीकरण (Explanation)
यह कहानी दर्शाती है कि जब आपका सामना अपने से बहुत अधिक शक्तिशाली शत्रु से हो, तो चतुर रणनीतियों और परिस्थितियों का उपयोग करके जीत हासिल की जा सकती है। कौवे स्वयं सांप को नहीं मार सकते थे, लेकिन उन्होंने राजा के सैनिकों का उपयोग करके अपना काम सिद्ध कर लिया।