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Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)

National Constitution Preamble

प्रस्तावना संविधान के एक संक्षिप्त परिचयात्मक बयान के रूप में कार्य करती है जो भारतीय राष्ट्र के मार्गदर्शक उद्देश्य, सिद्धांतों और दर्शन को निर्धारित करती है। यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है, जो अपने सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

📋 मुख्य तथ्य

मसुदा
Constituent Assembly of India (Based on Jawaharlal Nehru's Objectives Resolution)
स्वीकृत
1949-11-26
प्रभावी तिथि
1950-01-26
सुलेखक
Prem Behari Narain Raizada
Chief artist
Beohar Rammanohar Sinha
संशोधन
42nd Amendment Act (1976) added 'Socialist', 'Secular', and 'Integrity'

📜 पूर्ण पाठ

हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता,
प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

💡 मूल अवधारणाएँ

संप्रभु (Sovereign)

भारत एक स्वतंत्र देश है, और कोई भी बाहरी शक्ति इसकी आंतरिक या बाहरी नीतियों को निर्देशित नहीं कर सकती है।

समाजवादी (Socialist)

लोकतांत्रिक साधनों के माध्यम से गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करने की प्रतिबद्धता।

पंथनिरपेक्ष (Secular)

राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। सभी धर्मों को राज्य से समान सम्मान और सुरक्षा प्राप्त है।

लोकतांत्रिक (Democratic)

सरकार को अपना अधिकार लोगों की इच्छा से मिलता है, जिसे नियमित चुनावों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

गणराज्य (Republic)

राज्य का प्रमुख सीधे या परोक्ष रूप से लोगों द्वारा चुना जाता है, कोई वंशानुगत सम्राट नहीं होता।

न्याय (Justice)

बिना किसी भेदभाव के समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में उचित व्यवहार।

स्वतंत्रता (Liberty)

लोगों को अपने जीवन के तरीके चुनने, राजनीतिक विचार रखने और समाज में व्यवहार करने की स्वतंत्रता।

समता (Equality)

सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के समान विशेषाधिकार और अवसर प्राप्त हैं।

बंधुता (Fraternity)

भाईचारे की भावना और देश और उसके सभी लोगों के साथ एक भावनात्मक लगाव।

📚 ऐतिहासिक संदर्भ

प्रस्तावना 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किए गए और पेश किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' पर आधारित है, जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। इसमें केवल एक बार संशोधन किया गया था, 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा, जिसने तीन नए शब्द जोड़े: समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता। संविधान की मूल पांडुलिपि प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा हस्तलिखित थी और इसे शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा खूबसूरती से सजाया गया था, जिनमें ब्योहार राममनोहर सिन्हा भी शामिल थे, जिन्होंने प्रस्तावना पृष्ठ को रोशन किया था।

📏 नियम एवं शिष्टाचार

  • हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने के लिए प्रस्तावना को पढ़ना एक अभिन्न अंग है।
  • स्कूल की सभाओं में, छात्रों के बीच संवैधानिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों को स्थापित करने के लिए अक्सर प्रस्तावना पढ़ी जाती है।
  • इसे स्पष्ट रूप से पढ़ा जाना चाहिए, और मुख्य लोकतांत्रिक सिद्धांतों (न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व) पर जोर देने के लिए रुक-रुक कर पढ़ना चाहिए।
  • हालांकि राष्ट्रगान की तरह कानून द्वारा अनिवार्य कोई औपचारिक शारीरिक मुद्रा नहीं है, लेकिन जब इसे किसी सभा में औपचारिक रूप से पढ़ा जाता है तो सम्मानपूर्वक खड़े होने की प्रथा है।
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