परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
बुधवार, 14 ऑक्टोबर 2026सुविचार
→आजचे सुविचार उपलब्ध नाही
पंचांग
→संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणोनि संन्यासु आणि योगु । हा एकचि कीं गा पांगु । परी अज्ञानासी विभागु । भिन्नु दिसे ॥ ४२ ॥
📖 विस्तार →म्हणून संन्यास आणि कर्मयोग हे दोन्ही एकच आहेत, पण ज्यांना ज्ञान नाही अशा अज्ञानी लोकांना ते वेगवेगळे वाटतात.
म्हणोनि तूं आतां । झकविजे गा पांडुसुता । या कर्माचिया माथां । पाय देईं ॥ ३८४ ॥
📖 विस्तार →म्हणून हे अर्जुना, तू आता सावध हो आणि या कर्माच्या डोक्यावर पाय देऊन त्याला जिंकून घे (म्हणजेच कर्माच्या बंधनातून मुक्त हो).
दिन विशेष 30
सर्व पहा →
मोहन धारिया पुण्यतिथी
2013
दत्तोपंत ठेंगडी पुण्यतिथी
2004
अमर्त्य सेन यांना नोबेल पारितोषिक जाहीर
1998
गौतम गंभीर यांचा जन्म
1981
स्वामी रामानंद तीर्थ पुण्यतिथी
1972
मार्टिन ल्यूथर किंग ज्युनिअर यांना नोबेल शांती पुरस्कार
1964
धम्मचक्र प्रवर्तन दिन - नागपूर
1956
भारत गणेशपुरे यांचा जन्म
1953
पंडित निखिल बॅनर्जी जयंती
1931
रॉजर मूर जयंती
1927
ड्वाइट डी. आयसेनहॉवर जयंती
1890
लाला हरदयाल जयंती
1884एनडीए सरकारचे कार्यप्रारंभ
1999संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप घोषणा
1994शरदचंद्र मुक्तिबोध पुण्यतिथी
1991जागतिक मानक दिन
1970क्युबन मिसाईल संकट सुरू झाले
1962द. दि. पुंडलिक जयंती
1950चॅक येगर यांनी आवाजाचा वेग ओलांडला
1947माधव गाडगीळ यांचा जन्म
1946एर्विन रोमेल यांचे निधन
1944राल्फ लॉरेन जयंती
1939राधू कर्माकर जयंती
1921सी. आर. राव जयंती
1920लीला चिटणीस जयंती
1911के. हनुमंतय्या जयंती
1908कॅथरीन मॅन्सफिल्ड जयंती
1888पंजाब विद्यापीठाची स्थापना
1882रामचंद्र भिकाजी गुंजीकर जयंती
1862लॉर्ड हेस्टिंग्ज पुण्यतिथी
1829इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: मित्राला भेटणे आणि क्षमता व्यक्त करणे
Modals - Can/Cannot (क्षमता दर्शवणे)
- healthy — स्वस्थ
- discuss — चर्चा करना
- hobby — शौक
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →'भारत छोडो' आंदोलन: स्वातंत्र्याच्या लढ्यातील एक निर्णायक टप्पा
९ ऑगस्ट १९४२ रोजी सुरू झालेले 'भारत छोडो' आंदोलन हे भारतीय स्वातंत्र्यसंग्रामातील एक सुवर्णपान आहे. ...
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हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
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ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
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1000 साल पुराना सुडोकू: चौसठ योगिनी मंदिर के गणितीय चमत्कार और आधुनिक उपग्रह कक्षा
मुरैना के 11वीं शताब्दी के चौसठ योगिनी मंदिर, इसकी 64-ग्रिड सुडोकू जैसी ज्यामिति, और इसके वृत्ताकार ...
⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥