परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
गुरुवार, 08 ऑक्टोबर 2026सुविचार
→❝ शिक्षा के बिना मति गई, मति के बिना नीति गई। ❞
शिक्षा के बिना बुद्धि गई, बुद्धि के बिना नैतिकता गई।
पंचांग
→संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →यालागीं तो निरिच्छु । सर्वत्र पूर्ण संतोषु । जैसा कां नभःस्पर्शू । वायु तो ॥ २६९ ॥
📖 विस्तार →म्हणून तो पुरुष इच्छारहित असतो आणि सर्व ठिकाणी पूर्ण समाधानी असतो, ज्याप्रमाणे वारा आकाशाला स्पर्श करतो पण कशातही अडकत नाही.
म्हणोनि समर्थें जेणें। विशेषें आचारु करणें। तें अज्ञानासी देखणें। मार्गु होईल॥
📖 विस्तार →म्हणून ज्यांच्याकडे शक्ती किंवा ज्ञान आहे, त्यांनी आपले वागणे खूप चांगले आणि आदर्श ठेवावे, कारण सामान्य लोक त्यांच्याकडे बघूनच जीवनाचा मार्ग शिकतात.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
काश्मीर भूकंप
2005
जयप्रकाश नारायण स्मृती दिन
1979
चे गुवेरा यांना अटक
1967
मुन्शी प्रेमचंद स्मृती दिन
1936
भारतीय वायुसेना दिवस
1932
अभिनेते राज कुमार जयंती
1926जागतिक ऑक्टोपस दिवस
2023वर्षा भोसले स्मृती दिन
2012हिंडन एअर फोर्स स्टेशनवर संचलन
1993ब्रुनो मार्स जयंती
1985मुंबईतील १३ कापड गिरण्यांचे राष्ट्रीयीकरण
1983भारतीय वायुसेनेचा सुवर्ण महोत्सव
1982निकीता दत्त जयंती
1980क्रिकेटपटू सायरस भरूचा जयंती
1980अलेक्झांडर सोल्झेनित्सिन यांना नोबेल
1970लंडनमधील भीषण रेल्वे अपघात
1952दक्षा शेठ जयंती
1952माणिक सरकार जयंती
1945जी. पी. सिप्पी जयंती
1939लक्ष्मणराव इनामदार जयंती
1938सुभेंदू चॅटर्जी जयंती
1929प्रभाकर पाध्ये जयंती
1922पहिल्या बाल्कन युद्धाची सुरुवात
1912अल्बानियाचा राजा झॉग प्रथम जयंती
1895शिकागोची भीषण आग
1871इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: क्षमता दर्शवण्यासाठी 'Can' चा वापर
सहाय्यक क्रियापदे: Can आणि Cannot
- clean — साफ करना
- help — मदद करना
- finish — पूरा करना
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →चंद्रावर भारताची मोहीम: चांद्रयान ते गगनयान - अंतराळ प्रवासाचे अद्भुत पर्व!
भारताने अंतराळ क्षेत्रात केलेली प्रगती अविश्वसनीय आहे. चांद्रयान मोहिमांद्वारे चंद्रावर भारताची यशस्...
⏱️ 8 min readवन्यजीव सप्ताह: भारताच्या विविध प्राण्यांचे संरक्षण का महत्त्वाचे? | Paripath
दरवर्षी २ ते ८ ऑक्टोबर दरम्यान साजरा होणारा वन्यजीव सप्ताह, भारताच्या अद्भुत वन्यजीवनाचे महत्त्व अधो...
⏱️ 12 min read
हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
⏱️ 20 min read
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
⏱️ 12 min readशैक्षणिक खेळ
खेळा →साहित्य डाऊनलोड
मिळवा →सभा आवश्यकताएँ
सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥