परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
शुक्रवार, 04 सप्टेंबर 2026सुविचार
→❝ दया, क्षमा और शांति में ही ईश्वर बसते हैं। ❞
जहाँ दया, क्षमा और शांति होती है, वहीं ईश्वर का निवास होता है।
पंचांग
→आजचे पंचांग उपलब्ध नाही
संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →जैसा समुद्रु भरला तरी न सांडे । कीं उन्हाळियानें न सुके । तैसा लाभें न वाढे । हानि न विटे ॥
📖 विस्तार →ज्याप्रमाणे समुद्र पाण्याने पूर्ण भरला तरी आपली मर्यादा ओलांडत नाही आणि उन्हाळ्यात पाणी आटले तरी तो कोरडा पडत नाही, त्याप्रमाणे ज्ञानी पुरुष लाभाने हुरळून जात नाही आणि हानीने दुःखी होत नाही.
जैसा कवणु एकु कल्लोळु | आपणयांतें म्हणे मी केवळु | तो जळीं जळुचि मिसळु | जाहला कीं ना ॥ २२२ ॥
📖 विस्तार →ज्याप्रमाणे समुद्रातील एखादी लाट स्वतःला वेगळी समजते, पण शेवटी ती पाण्यातच मिसळून जाते आणि पाणीच होते, तसेच ज्ञानी पुरुष स्वतःला ब्रह्मापासून वेगळे समजत नाही.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
सायरस मिस्त्री यांचे निधन
2022
मदर तेरेसा यांना संत पद प्रदान
2016
भारतीय क्रिकेटपटू किरण मोरे यांचा जन्म
1962
अभिनेता ऋषी कपूर यांचा जन्म
1952
महात्मा गांधी लंडनला रवाना
1888
दादाभाई नौरोजी यांची जयंती
1825हरविंदर सिंगने पॅरालिम्पिकमध्ये पदक जिंकले
2021जागतिक लैंगिक आरोग्य दिन
2010स्टीव्ह अर्विन यांचे निधन
2006गुगल कंपनीची स्थापना
1998गायिका बियॉन्से नोल्सचा जन्म
1981मार्क स्पिट्झचा ऑलिम्पिक विक्रम
1972पुरातत्वशास्त्रज्ञ का. ना. दीक्षित यांचे निधन
1970भारत-पाक युद्ध: चाविंडाची लढाई सुरू
1965बी. पी. वाडिया यांचे निधन
1951ऍडमिरल सुशील कुमार यांचा जन्म
1944चित्रकार वासुदेव कामत यांचा जन्म
1932जॉन मॅकार्थी यांचा जन्म
1927मुसिरी सुब्रमण्यम अय्यर यांचा जन्म
1923क्रांतिकारक जतीन दास यांची जयंती
1915सदाशिव गोविंद बर्वे यांचा जन्म
1912मॅक्स डेलब्रुक यांचा जन्म
1906गिजूभाई बधेका यांची जयंती
1885जगातील पहिल्या केंद्रीय वीज केंद्राची सुरुवात
1882फ्रेंच तिसऱ्या प्रजासत्ताकाची स्थापना
1870विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →
ISRO मिशन कंट्रोल स्ट्रैटेजी: अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रोटोकॉल के साथ परीक्षा में सफलता कैसे पाएं?
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महाराष्ट्र मंतरा (MANTRA) हब: बौद्धिक संपदा और अनुसंधान व्यावसायीकरण का नया केंद्र
महाराष्ट्र सरकार 1 जुलाई से मुंबई विश्वविद्यालय में 'मंतरा हब' शुरू कर रही है, जो छात्रों के शोध को ...
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प्रस्तावना से ग्रहों तक: कैसे अनुच्छेद 51A(h) — वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संवैधानिक कर्तव्य — भारत के २०२६ के अंतरिक्ष मिशनों को शक्ति दे रहा है
जानें कि कैसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मौलिक कर्तव्य गगनयान औ...
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स्कूल असेंबली (परिपाठ) के फायदे और छात्रों पर प्रभाव
स्कूल असेंबली या परिपाठ के छात्रों पर होने वाले मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक लाभों को विस्तार से जानें। क...
⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥