परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
शुक्रवार, 03 जुलै 2026सुविचार
→❝ जो भी जीव मिले, उसे ईश्वर मानिये। ❞
आप जिस भी जीव से मिलें, उसे साक्षात ईश्वर का रूप मानें।
पंचांग
→आज का व्यक्तित्व
सर्व पहा →संत नामदेव
वारकरी संप्रदायाचे महत्त्वाचे संत आणि प्रचारक, ज्यांनी विठ्ठल भक्तीचा संदेश पंजाबपर्यंत पोहोचवला.
सविस्तर माहिती वाचा →संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणौनि स्वधर्मु जो आपुला । तोचि अनुष्ठावा भला । जरी कठीण जाहला । तरी तोचि ॥ १६९ ॥
📖 विस्तार →म्हणून आपला जो स्वधर्म (कर्तव्य) आहे, तोच पाळणे चांगले आहे. तो जरी करायला कठीण वाटला, तरी तोच करावा.
म्हणोनि अर्जुना हें जाणावें | जे विषय सर्वथा त्याजावे | मग इंद्रियें आपैसीं स्वभावें | निभ्रांत होती || ३०३ ||
📖 विस्तार →म्हणून अर्जुना, हे लक्षात घे की विषयांचा (भोगांचा) पूर्णपणे त्याग केला पाहिजे. असे केल्यावर इंद्रिये आपोआप आणि सहजपणे स्थिर होतात.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
टायगर हिलवर भारतीय सैन्याचा विजय
1999
हरभजन सिंग यांचा जन्म
1980
सिमला करारावर स्वाक्षरी
1972
भारतीय स्वातंत्र्य विधेयक मांडले गेले
1947
लोकमान्य टिळक यांच्यावरील ऐतिहासिक खटला
1908
कार्ल बेंझ यांच्या मोटारगाडीचे पहिले यशस्वी परीक्षण
1886आंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक पिशवी मुक्त दिन
2024इजिप्तमध्ये लष्करी उठाव
2013भारतीय रुपयाचे दुसरे अवमूल्यन
1991जिम मॉरिसन यांचे निधन
1971इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाची स्थापना
1970टॉम क्रूझ यांचा जन्म
1962गायक अमित कुमार यांचा जन्म
1952अभिनेते शक्ती कपूर यांचा जन्म
1950आर. के. धवन यांचा जन्म
1943हॅरिसन श्मिट यांचा जन्म
1935पहिली रंगीत टीव्ही प्रसारणाची चाचणी
1928एम. पी. बिर्ला यांचा जन्म
1903हंसा मेहता यांचा जन्म
1897हरिभाऊ उपाध्याय यांचा जन्म
1892फ्रांत्स काफ्का यांचा जन्म
1883गेटीसबर्गची लढाई समाप्त
1863ग्रेट ऑक पक्षाची शेवटची जोडी मारली गेली
1844जॉर्ज वॉशिंग्टन यांनी सैन्याची सूत्रे हाती घेतली
1775कॅनडातील क्वेबेक शहराची स्थापना
1608इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: चालू वर्तमानकाळ आणि हॉटेलमधील संभाषण
चालू वर्तमानकाळ
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- Delicious — स्वादिष्ट
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →
आंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिन: संवादाचे पूल कसे जोडायचे? | परिपाठ
२३ सप्टेंबर हा आंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिन म्हणून साजरा केला जातो. हा दिवस सांकेतिक भाषेचे महत्त...
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हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
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अल्लूरी सीताराम राजू से नेतृत्व के सबक: मन्यम वीरूडू की रणनीतिक प्रतिभा
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ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
⏱️ 12 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥