परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
शनिवार, 20 जून 2026सुविचार
→❝ जो दीन-दुखियों को अपनाता है, उसे ही साधु समझो। ❞
जो पीड़ित और दुखियों को अपना समझता है, वही सच्चा साधु है और ईश्वर वहीं है।
पंचांग
→आज का व्यक्तित्व
सर्व पहा →
लक्ष्मणराव किर्लोस्कर
लक्ष्मणराव किर्लोस्कर एक भारतीय उद्योगपति थे जिन्होंने किर्लोस्कर समूह की स्थापना की, जो भारत के सबसे बड़े इंजीनियरिंग समूहों में से एक है। उन्हें महाराष्ट्र में औद्योगिक क्रांति क...
सविस्तर माहिती वाचा →संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →तैसेचि हेही सैन्य । पाहावे म्यां सन्नद्ध पूर्ण । जे युद्धीं अतिप्रवीण । आले असती ॥
📖 विस्तार →त्याचप्रमाणे, युद्धासाठी पूर्णपणे सज्ज झालेले हे सैन्य मला पाहायचे आहे, जे युद्धकलेत अत्यंत निपुण आहेत आणि येथे लढण्यासाठी आले आहेत.
जेथें विषयांचें नांव नाहीं । आणि इंद्रियांची गोठी नाहीं । तेथें सुख आपणचि पाही । भोगिजे गा ॥ ५२ ॥
📖 विस्तार →जिथे विषयांचे नावही नाही आणि इंद्रियांची चर्चाही नाही, अशा ठिकाणी मनुष्य स्वतःच स्वतःच्या सुखाचा अनुभव घेतो.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
जागतिक शरणार्थी दिन
1994
पी. व्ही. नरसिंह राव भारताचे पंतप्रधान बनले
1991
तर्कतीर्थ लक्ष्मणशास्त्री जोशी स्मृतिदिन
1990
व्हिक्टोरिया टर्मिनस (CST) इमारतीचे काम पूर्ण
1887विराट कोहलीचे कसोटी पदार्पण
2011परवेझ मुशर्रफ पाकिस्तानचे राष्ट्राध्यक्ष बनले
2001सौरव गांगुलीचे कसोटी पदार्पण
1996जी. पार्थसारथी स्मृतिदिन
1995जागतिक उत्पादकता दिन
1980निकोल किडमन यांचा जन्म
1967अमेरिका-सोव्हिएत रशिया दरम्यान 'हॉट लाईन' करार
1963संपत पाल देवी यांचा जन्म
1960विक्रम सेठ यांचा जन्म
1952बंगालच्या फाळणीचा निर्णय
1947सिद्धार्थ कला व विज्ञान महाविद्यालयाची स्थापना
1946अभिनेता मुरली यांचा जन्म
1944ए. एस. आनंद यांचा जन्म
1936एल. के. झा यांचा जन्म
1913शांताराम आठवले यांचा जन्म
1910डॉ. सत्यनारायण सिंह यांचा जन्म
1910ब. कृ. घैसास यांचा जन्म
1904बी. जी. हॉर्निमन यांचा जन्म
1873सॅम्युअल मोर्स यांना टेलिग्राफचे पेटंट मिळाले
1840राणी व्हिक्टोरिया यांचा राज्याभिषेक
1837कलकत्त्याची काळकोठडी घटना (Black Hole of Calcutta)
1756इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: चालू वर्तमानकाळ
चालू वर्तमानकाळ
- borrow — उधार लेना
- silence — शांति
- return — वापस करना
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
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आंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिन: संवादाचे पूल कसे जोडायचे? | परिपाठ
२३ सप्टेंबर हा आंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिन म्हणून साजरा केला जातो. हा दिवस सांकेतिक भाषेचे महत्त...
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पी. टी. उषा: भारतीय एथलेटिक्स की 'गोल्डन गर्ल' की पूरी जीवनी
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स्वराज्य की जननी: राजमाता जिजाबाई पुण्यतिथि - एक महान प्रेरणा
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गणपति उत्सव और बच्चों की मस्ती: संस्कार और आनंद का अद्भुत मेल
गणपति उत्सव बच्चों के जीवन में न केवल खुशियाँ लाता है, बल्कि उन्हें टीम वर्क, अनुशासन और पर्यावरण सं...
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥