परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
रविवार, 29 नोव्हेंबर 2026सुविचार
→❝ काम ऐसा करो कि दुनिया आपके परिश्रम की सराहना करे। Meaning_en: Excellence in work is the best way to earn global respect and recognition. Meaning_hi: अपने कार्य की गुणवत्ता ऐसी रखें कि वह उदाहरण बन जाए। person_ref: {slug: laxmanrao-kirloskar, name_mr: लक्ष्मणराव किर्लोस्कर, auto_create: true, birth_date: 1869-06-20, death_date: 1956-09-26, name_en: Laxmanrao Kirloskar, name_hi: लक्ष्मणराव किर्लोस्कर, person_type: Industrialist, short_bio_en: Founder of the Kirloskar Group, one of India's oldest industrial conglomerates., short_bio_mr: किर्लोस्कर समूहाचे संस्थापक आणि थोर उद्योजक., wikipedia_url: https://en.wikipedia.org/wiki/Laxmanrao_Kirloskar}, tags: [{slug: work-ethic, name_mr: कार्यसंस्कृती, name_en: Work Ethic}, {slug: excellence, name_mr: उत्कृष्टता, name_en: Excellence}] ❞
आपल्या कामाचा दर्जा इतका उच्च ठेवावा की संपूर्ण जग त्याला मान देईल.
पंचांग
→संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणोनि उचित कर्म । जेणे पाविजे स्वधर्म । तेचि करीं तूं उत्तम । धनुर्धरा ॥
📖 विस्तार →म्हणून अर्जुना, जे कर्म करणे योग्य आहे आणि ज्याने आपल्या स्वधर्माचे (कर्तव्याचे) पालन होते, तेच श्रेष्ठ कर्म तू कर.
म्हणोनि संन्यासु आणि योगु । हा एकचि कीं गा पांगु । परी अज्ञानासी विभागु । भिन्नु दिसे ॥ ४२ ॥
📖 विस्तार →म्हणून संन्यास आणि कर्मयोग हे दोन्ही एकच आहेत, पण ज्यांना ज्ञान नाही अशा अज्ञानी लोकांना ते वेगवेगळे वाटतात.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →शोभा सेन स्मृतिदिन
2017ओ. पी. मुंजाळ स्मृतिदिन
2015ऑपरेशन ब्लॅक टोरनॅडो समाप्ती
2008जॉर्ज हॅरिसन स्मृतिदिन
2001जे. आर. डी. टाटा स्मृतिदिन
1993आशियाई क्रीडा स्पर्धा दिल्ली
1982पॅलेस्टिनी जनतेशी आंतरराष्ट्रीय एकता दिन
1977विनय आपटे जयंती
1967मारोतराव कन्नमवार स्मृतिदिन
1963विनोद दुआ जयंती
1951अस्पृश्यता निवारण कलम १७ संमत
1948संयुक्त राष्ट्र पॅलेस्टाईन फाळणी ठराव
1947पं. भजन सोपोरी जयंती
1944गुरबचन सिंग सलारिया जयंती
1935के. एस. सुदर्शन जयंती
1931ताहिर हुसेन जयंती
1928वि. आ. बुवा जयंती
1926पं. बाळकृष्णबुवा इचलकरंजीकर स्मृतिदिन
1926डॉ. ना. सु. हार्डीकर जयंती
1908पं. ओंकारनाथ ठाकूर जयंती
1903शोभना समर्थ जयंती
1901एफ.सी. बार्सेलोना स्थापना
1899ठक्कर बाप्पा जयंती
1869लुईसा मे अल्कोट जयंती
1832स्वालीची लढाई
1612इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: वाचनालयातील संभाषण आणि 'Can' चा वापर
Modals: Can चा वापर
- silence — शांति
- borrow — उधार लेना
- return — वापस करना
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →चंद्रावर भारताची मोहीम: चांद्रयान ते गगनयान - अंतराळ प्रवासाचे अद्भुत पर्व!
भारताने अंतराळ क्षेत्रात केलेली प्रगती अविश्वसनीय आहे. चांद्रयान मोहिमांद्वारे चंद्रावर भारताची यशस्...
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हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
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ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
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1000 साल पुराना सुडोकू: चौसठ योगिनी मंदिर के गणितीय चमत्कार और आधुनिक उपग्रह कक्षा
मुरैना के 11वीं शताब्दी के चौसठ योगिनी मंदिर, इसकी 64-ग्रिड सुडोकू जैसी ज्यामिति, और इसके वृत्ताकार ...
⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥