परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
सोमवार, 28 सप्टेंबर 2026सुविचार
→❝ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। ❞
सेवा ही सच्ची भक्ति है।
पंचांग
→संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →जैसा कां कस्तूरीचां कणीं । परिमळु असे सर्वपणीं । तैसा तो अंतःकरणीं । बोधु वसे ॥
📖 विस्तार →ज्याप्रमाणे कस्तुरीच्या एका लहानशा कणातही तिचा सुगंध पूर्णपणे भरलेला असतो, त्याप्रमाणे त्या ज्ञानी पुरुषाच्या अंतःकरणात आत्मज्ञान पूर्णपणे ठसलेले असते.
जयाचीं कर्मांतरें । संकल्पाचीं उत्तरें । सांडिलीं साचारें । फळाशेसीं ॥
📖 विस्तार →ज्याच्या सर्व कर्मांमधून संकल्पाचा (इच्छेचा) आणि फळाच्या आशेचा पूर्णपणे त्याग झाला आहे, तोच खरा ज्ञानी होय.
दिन विशेष 28
सर्व पहा →
भारतीय लष्कराचा सर्जिकल स्ट्राईक
2016
ॲस्ट्रोसॅट (ASTROSAT) प्रक्षेपण
2015
अभिनव बिंद्रा जयंती
1982
नागपूर करार
1953
भारतरत्न लता मंगेशकर जयंती
1929
शहीद भगत सिंग जयंती
1907
व्ही. शांताराम जयंती
1901ब्रजेश मिश्रा पुण्यतिथी
2012मुलक राज आनंद पुण्यतिथी
2004माईल्स डेव्हिस पुण्यतिथी
1991रणबीर कपूर वाढदिवस
1982जीसॅट-१ (GSAT-1) मोहिमेची सुरुवात
1981स. का. पाटील पुण्यतिथी
1963मिहिर सेन यांचा पराक्रम
1958अंशू जैन जन्म
1949हैदराबाद विलीनीकरणाची मागणी
1947ब्रिजिट बार्दो जन्म
1934पुणे कराराची अंमलबजावणी चर्चा
1932पेनिसिलिनचा शोध
1928के. सी. कुलिश जयंती
1923व्ही. आर. कृष्णा अय्यर जयंती
1921बी. व्ही. कारंत जयंती
1920लक्ष्मणराव इनामदार जयंती
1913मुसी नदीचा महापूर (हैदराबाद)
1908लुई पाश्चर पुण्यतिथी
1895बहादूर शाह जफर राज्याभिषेक
1837जागतिक रेबीज दिन
माहितीच्या सार्वत्रिक उपलब्धतेसाठीचा आंतरराष्ट्रीय दिवस
इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: हॉटेलमध्ये आणि आज्ञार्थी वाक्ये
आज्ञार्थी वाक्ये
- menu — व्यंजनों की सूची
- order — आदेश देना / मंगवाना
- delicious — स्वादिष्ट
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →चंद्रावर भारताची मोहीम: चांद्रयान ते गगनयान - अंतराळ प्रवासाचे अद्भुत पर्व!
भारताने अंतराळ क्षेत्रात केलेली प्रगती अविश्वसनीय आहे. चांद्रयान मोहिमांद्वारे चंद्रावर भारताची यशस्...
⏱️ 8 min read
मान्सूनचा निरोप: निसर्गाच्या नव्या ऋतूसाठी भारताची तयारी
जसजसा सप्टेंबर महिना सरतो, तसतसा भारतभर मान्सूनचा परतीचा प्रवास सुरू होतो. हा केवळ पावसाळ्याचा शेवट ...
⏱️ 12 min read
हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
⏱️ 20 min read
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
⏱️ 12 min readशैक्षणिक खेळ
खेळा →साहित्य डाऊनलोड
मिळवा →सभा आवश्यकताएँ
सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥