परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
बुधवार, 15 जुलै 2026सुविचार
→❝ विद्वान सर्वत्र पूजे जाते हैं। ❞
विद्वान की हर जगह पूजा होती है।
पंचांग
→आजचे पंचांग उपलब्ध नाही
संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणोनि उचित जे कर्म । आणि विहित जे धर्म । तेचि आचरावे उत्तम । फळाशा सांडूनि ॥
📖 विस्तार →म्हणून जे योग्य कर्म आहे आणि जे शास्त्राने सांगितलेले कर्तव्य आहे, तेच फळाची अपेक्षा न ठेवता उत्तम प्रकारे करावे.
तरी अर्जुना हे ऐकें । जो हा निजधर्मु न चुके । तो सकळ सुखें ओळखे । आपणयांतें ॥ १२९ ॥
📖 विस्तार →अर्जुना, हे नीट ऐक. जो माणूस आपला स्वधर्म (कर्तव्य) कधीही सोडत नाही, त्याला सर्व सुखे आपोआप प्राप्त होतात आणि तो स्वतःला ओळखू शकतो.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
भारतातील 'तार' (Telegram) सेवा बंद
2013
बालगंधर्व (नारायण श्रीपाद राजहंस) पुण्यतिथी
1967
मुंबईत पहिली बस सेवा सुरू
1926
के. कामराज जन्मदिवस
1903दिलीप सरदेसाई पुण्यतिथी
2011ट्विटरचे (Twitter) जागतिक लोकार्पण
2006कुंभकोणम शाळा दुर्घटना
2004जागतिक युवा कौशल्य दिन
2000निटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टीम (NES) लाँच
1983पंतप्रधान मोरारजी देसाई यांचा राजीनामा
1979जवाहरलाल नेहरू यांना 'भारतरत्न' जाहीर
1955बोईंग ७०७ (Boeing 707) चे पहिले उड्डाण
1954हसनल बोलकिया जन्मदिवस
1946प्रभाष जोशी जन्मदिवस
1937एम. टी. वासुदेवन नायर जन्मदिवस
1933बादल सरकार जन्मदिवस
1925मधुसूदन कालेलकर जन्मदिवस
1924लिओन लेडरमन जन्मदिवस
1922बोईंग (Boeing) कंपनीची स्थापना
1916मोहम्मद नासीर जन्मदिवस
1912अँटोन चेखव पुण्यतिथी
1904जमशेडजी फ्रामजी मदन जन्मदिवस
1883नेपोलियन बोनापार्टचे शरणागमन
1815रोसेटा स्टोनचा (Rosetta Stone) शोध
1799रेम्ब्रँड (Rembrandt) जन्मदिवस
1606इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: मित्राला भेटणे आणि आज्ञार्थी वाक्ये
आज्ञार्थी वाक्ये (वाक्यांचे प्रकार)
- pleasant — सुखद
- gather — इकट्ठा करना
- reminisce — पुरानी यादें ताजा करना
प्रश्नमंजुषा
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सर्व पहा →
महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों के छात्रों की चमकेगी किस्मत! अब 'नासा' और 'इसरो' की करेंगे सैर
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों को नासा (NASA) और इसरो (ISRO) की यात्रा पर भेजन...
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फिनिश लाइन के परे: खेलो इंडिया २०२६ में कबड्डी और खो-खो के जरिए 'सहवीर्यं करवावहै' का पुनरुत्थान
जानिए कैसे २०२६ के खेलो इंडिया स्वदेशी खेल 'सहवीर्यं करवावहै' जैसी प्राचीन गुरुकुल नैतिकता को पुनर्ज...
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प्रस्तावना से ग्रहों तक: कैसे अनुच्छेद 51A(h) — वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संवैधानिक कर्तव्य — भारत के २०२६ के अंतरिक्ष मिशनों को शक्ति दे रहा है
जानें कि कैसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मौलिक कर्तव्य गगनयान औ...
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स्कूल असेंबली (परिपाठ) के फायदे और छात्रों पर प्रभाव
स्कूल असेंबली या परिपाठ के छात्रों पर होने वाले मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक लाभों को विस्तार से जानें। क...
⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥