परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
शनिवार, 04 जुलै 2026सुविचार
→❝ सपने वे हैं जो आपको सोने नहीं देते। ❞
सपने वे नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वे होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।
पंचांग
→आजचे पंचांग उपलब्ध नाही
संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणोनि आत्मलाभेविणें । कांहींच गोड न मने जेणें । तोचि स्थितप्रज्ञु जाणें । अर्जुना तूं ॥
📖 विस्तार →म्हणून हे अर्जुना, ज्याला आत्मप्राप्तीशिवाय दुसरे काहीही गोड वाटत नाही, तोच खरा स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धीचा) आहे असे तू समज.
तरी उचित कर्म सांडावे । कीं अप्रवृत्ती व्हावे । हे न घडे स्वभावे । कवणे काळी ॥
📖 विस्तार →आपले कर्तव्य सोडून देणे किंवा काहीच न करता रिकामे बसणे, हे माणसाच्या स्वभावामुळे कधीही शक्य होत नाही.
दिन विशेष 25
सर्व पहा →
पिंगली वेंकय्या पुण्यतिथी
1963
भारतीय स्वातंत्र्य विधेयक संसदेत मांडले
1947
नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांनी आझाद हिंद फौजेचे नेतृत्व स्वीकारले
1943
मेरी क्युरी पुण्यतिथी
1934
स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथी
1902
गुलझारीलाल नंदा यांचा जन्म
1898
स्टॅच्यू ऑफ लिबर्टी फ्रान्सकडून भेट
1886
अमेरिकन स्वातंत्र्य दिन
1776हिग्ज बोसन (देव कण) शोध जाहीर
2012डीप इम्पॅक्ट मोहिमेचा यशस्वी टप्पा
2005पेस-भूपती जोडीचा विम्बल्डन विजय
1999मार्स पाथफाईंडर मंगळावर उतरले
1997हॉटमेल (Hotmail) सेवेचा प्रारंभ
1996स्टेफी ग्राफचा विम्बल्डन विजय
1992फिलिपिन्सचा स्वातंत्र्य दिन
1946शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी यांचा जन्म
1924अभिनेत्री नसीम बानू यांचा जन्म
1916जॅक जॉन्सन यांचा ऐतिहासिक विजय
1910पंडित ओंकारनाथ ठाकूर यांचा जन्म
1897कॅल्विन कूलिज जन्म
1872ॲलिस इन वंडरलँड कथेची सुरुवात
1862हेन्री डेव्हिड थोरो यांचे वाल्डन तलावाकाठी वास्तव्य
1845ग्रँड जंक्शन रेल्वे सुरू
1837जेम्स मनरो पुण्यतिथी
1831थॉमस जेफरसन आणि जॉन ॲडम्स यांचे निधन
1826विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →
आदर्श परिपाठ के लिए १० महत्वपूर्ण टिप्स: स्कूली जीवन में अनुशासन और संस्कार
अपने स्कूल की सुबह की सभा (परिपाठ) को आदर्श, आकर्षक और अनुशासित बनाने के लिए 10 महत्वपूर्ण टिप्स जान...
⏱️ 15 min read
फिनिश लाइन के परे: खेलो इंडिया २०२६ में कबड्डी और खो-खो के जरिए 'सहवीर्यं करवावहै' का पुनरुत्थान
जानिए कैसे २०२६ के खेलो इंडिया स्वदेशी खेल 'सहवीर्यं करवावहै' जैसी प्राचीन गुरुकुल नैतिकता को पुनर्ज...
⏱️ 15 min read
प्रस्तावना से ग्रहों तक: कैसे अनुच्छेद 51A(h) — वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संवैधानिक कर्तव्य — भारत के २०२६ के अंतरिक्ष मिशनों को शक्ति दे रहा है
जानें कि कैसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मौलिक कर्तव्य गगनयान औ...
⏱️ 15 min read
स्कूल असेंबली (परिपाठ) के फायदे और छात्रों पर प्रभाव
स्कूल असेंबली या परिपाठ के छात्रों पर होने वाले मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक लाभों को विस्तार से जानें। क...
⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
खेळा →साहित्य डाऊनलोड
मिळवा →सभा आवश्यकताएँ
सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥