परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
गुरुवार, 02 जुलै 2026सुविचार
→❝ जो पीड़ितों को अपना कहता है वही साधु है; ईश्वर उसी में है। ❞
जो पीड़ित और असहायों को अपना मानता है, उसे ही सच्चा साधु समझें; ईश्वर वहीं निवास करता है।
पंचांग
→संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →जैसा गगनीं गगनाभासु । तो गगनींचि होय विनाशु । तैसा आत्मप्रकाशीं प्रकाशु । आत्मारूपु ॥
📖 विस्तार →ज्याप्रमाणे आकाशात दिसणारा आकाशाचा आभास आकाशातच लय पावतो, त्याप्रमाणे आत्मप्रकाशात दिसणारा प्रकाश हा आत्मरूपच असतो.
म्हणोनि उचित कर्म । जेणे पाविजे परम धर्म । ते आचरावे सप्रेम । निरंतर ॥
📖 विस्तार →म्हणून जे योग्य कर्तव्य आहे, ज्याने श्रेष्ठ धर्माची प्राप्ती होते, तेच कर्म प्रेमाने आणि सतत करत राहावे.
दिन विशेष 26
सर्व पहा →
कारगिल युद्ध - टायगर हिलवरील हल्ला तीव्र
1999
सिमला करारावर स्वाक्षरी
1972
हरी विनायक पाटस्कर यांचे निधन
1968
अर्नेस्ट हेमिंग्वे यांचे निधन
1961
नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांना अटक
1940डग्लस एंजेलबर्ट यांचे निधन
2013चतुरानन मिश्रा यांचे निधन
2011पी. के. वासुदेवन नायर यांचे निधन
2005जागतिक युएफओ (UFO) दिन
2001जागतिक क्रीडा पत्रकार दिन
1994उत्तर आणि दक्षिण व्हिएतनामचे एकत्रीकरण
1976गौतमी कपूर यांचा जन्म
1974अमेरिकन नागरी हक्क कायदा १९६४ संमत
1964वॉलमार्ट स्टोअरची सुरुवात
1962पवन मल्होत्रा यांचा जन्म
1958आलोक कुमार यांचा जन्म
1948एस. आर. श्रीनिवास वर्धन यांचा जन्म
1940अमेलिया इअरहार्ट यांचे अदृश्य होणे
1937आशिष नंदी यांचा जन्म
1937थुरगुड मार्शल यांचा जन्म
1908हॅन्स बेथे यांचा जन्म
1906झेपलिन एअरशिपचे पहिले उड्डाण
1900जेम्स गारफिल्ड यांच्यावर गोळीबार
1881साल्व्हेशन आर्मीची स्थापना
1865वरमोंटमध्ये गुलामगिरीची समाप्ती
1777नोस्ट्राडेमस यांचे निधन
1566इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: क्षमता दर्शवण्यासाठी 'Can' चा वापर
सहाय्यक क्रियापदे: Can आणि Cannot
- clean — साफ करना
- help — मदद करना
- finish — पूरा करना
प्रश्नमंजुषा
खेळा →विशेष लेख (ब्लॉग)
सर्व पहा →किशोर कुमार: अष्टपैलू प्रतिभेचा बादशाह!
भारतीय सिनेसृष्टीतील एक असाधारण व्यक्तिमत्व म्हणजे किशोर कुमार. त्यांच्या अष्टपैलू प्रतिभेने त्यांनी...
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हम्पी के 'डिजिटल ट्विन्स': ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की खोज
जानिए कैसे ३डी लेजर स्कैनिंग और वीआर तकनीक विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी को डिजिटल रूप में पुनर...
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अल्लूरी सीताराम राजू से नेतृत्व के सबक: मन्यम वीरूडू की रणनीतिक प्रतिभा
अल्लूरी सीताराम राजू, 'मन्यम वीरूडू' की रणनीतिक प्रतिभा को जानें। जानें क्यों उनका आदिवासी सशक्तिकरण...
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ग्रैंड एनीकट (कल्लनई): चोल राजवंश के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों का खुलासा
ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) के 2,000 साल पुराने इंजीनियरिंग रहस्यों को जानें, जो चोल राजवंश द्वारा निर्मित...
⏱️ 12 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥