परिपाठ — महाराष्ट्रातील शाळांसाठी दैनंदिन शालेय परिपाठ
दररोजचा सुविचार, दिनविशेष, पंचांग, बातम्या, प्रार्थना, बोधकथा आणि शैक्षणिक साहित्य — सर्व एकाच ठिकाणी
आजचे विशेष
बुधवार, 22 एप्रिल 2026सुविचार
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पंचांग
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संस्कृत सुभाषित
सर्व पहा →म्हणोनि तोचि स्थिरबुद्धि । जयाचीं इंद्रियें आपुलिया आधीं । जो विषयांचिया बाधीं । सांडिजेना ॥ १९५ ॥
📖 विस्तार →म्हणून ज्याची इंद्रिये स्वतःच्या ताब्यात असतात आणि ज्याला विषयांच्या (भोगांच्या) विकारांची बाधा होत नाही, तोच खरा स्थिर बुद्धीचा पुरुष होय.
हे शब्दब्रह्म अशेषा । जेथूनि प्रसवले सुवेषा । तेथूनि हे मतिलेषा । लाभु जाहला ॥ २३ ॥
📖 विस्तार →ज्या ठिकाणाहून संपूर्ण वेद (शब्दब्रह्म) सुंदर रूपाने निर्माण झाले, त्याच ठिकाणाहून माझ्या बुद्धीला हा थोडासा लाभ (ज्ञान) मिळाला आहे.
इंग्रजी शिक्षण
शिका →विषय: बागेतील संवाद आणि आज्ञार्थी वाक्ये
वाक्यांचे प्रकार (आज्ञार्थी वाक्ये)
- grass — घास
- slide — फिसलपट्टी
- swing — झूला
प्रश्नमंजुषा
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सर्व पहा →
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⏱️ 15 min readशैक्षणिक खेळ
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सर्व पहा →Jana Gana Mana
National Anthemजन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा, द्राविड़-उत्कल-बङ्ग। विन्ध्य-हिमाचल-यमुना-गङ्गा, उच्छल-जलधि-तरङ्ग। तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मङ्गल-दायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे॥
National Pledge (Pratidnya / Pratigya)
National Pledgeभारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैं। मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और इसकी समृद्ध तथा विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैं सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूँगा। मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान करूँगा और हर किसी के साथ विनीत रहूँगा। मैं अपने देश और देशवासियों के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। उनके कल्याण और समृद्धि में ही मेरा सुख निहित है।
Preamble to the Constitution of India (Sanvidhan)
National Constitution Preambleहम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
Vande Mataram
National Songवन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं, सुखदां वरदां मातरम्॥